ठीक तुम्हारी तरह
"हम सब दो लोग हैं, एक जो जी ता है और एक जो जीने की कोशिश करता है। क्या जीने की कोशिश करना खुश रहने की कोशिश करना है? क्या जीवन जीने के लिए खुश रहना जरूरी है? या फिर खुश रहने के लिए जीवन जीना?जीवन तो ये पंछी भी जीते है, क्या ये पंछी खुश हैं?" "और पंडित क्या हाल हैं?" पीछे से आवाज आई। "आओ मियां तानसेन,कहो कैसे हो?" मैं सुजीत को तानसेन बुलाता था क्योंकि वो गाता बहुत अच्छा था और अपने गीत खुद ही लिखता था। उम्र में मेरे बराबर था पर दुनियादारी में मुझसे बेहतर था। "तुम बताओ पंडित आजकल कहाँ किसके ख्वाबों में डूबे रहते हो!" इस नकली तानसेन ने मेरे मन की बात भांप ली थी। "वही यार पोस्टर वाली , फिल्म लगी है जिसकी।" " कौन वो मनीषा कोइराला!... अबे पंडित तुम भी ना!"" अच्छा मियां एक बात पूछूं?" "पूछ डालो पंडित , सवाल हमेशा पूछ लेने चाहिए बिना जवाब की आशा करे" "जीवन जीने के लिया सबसे जरूरी क्या है?" "जीवन जीने के लिए...... हम्म्म........ प्रेम! हां प्रेम सबसे जरूरी है।" "प्रेम? पर वो कैसे?" ...